त्रिदोष

=======================

वात , पीत और कफ को सरल उदाहरणों द्वारा समझिए ।
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूप पुरुषार्थ चतुष्टय का आधार स्वस्थ शरीर ही हैं । कहा भी गया है :--- शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ।

स्वास्थ्य की सही परिभाषा यह है :---

समदोष: समाग्निश्च समधातु मलक्रियः ।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमन: स्वस्थ इत्यभिधीयते ।।

जिनके तीनों दोष :--- वात, पित्त और कफ समान हो, जठराग्नि न तीक्ष्ण न मन्द हो, शरीर को धारण करने वाले सात धातु :--- रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य समान अनुपात में हो, मल मूत्र की सम्यक् प्रवृत्ति हो, तथा दस इंद्रियां, मन एवं उनका स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ कहा जाता है । स्वास्थ्य की ऐसी हृदयग्राही और व्यवस्थित परिभाषा अन्यत्र मिलनी दुर्लभ है ।


आइए, अब इन तीनों दोषों को उदाहरण से समझते हैं ।


मेरे पास एक चिप्स का पैकेट है ।  lays कपनी का है। 
ये वात का अच्छा उदाहरण है। 


वात का अभिप्राय हवा होता है । यह वात की मुख्य पहचान है । पैकेट में जितनी चिप्स नही है उतनी हवा भरी है । जिस भोजन में हवा भरी हो वो वात को बढ़ाएगा। हवा मतलब ही है वात। 


वात की दूसरी पहचान है हल्कापन । चीप्स को आप हाथ में रखिये। ये एकदम हल्की है। हल्के भोजन वात को बढ़ाएंगे। हल्का शरीर है तो इसका मतलब वात ज्यादा है शरीर में। 


वात की तीसरी पहचान है सूखापन और खुरदरापन ।
चीप्स को छूने से रुखा (खुरखुरा) लगता है। रूखापन मतलब है वात। शरीर पर वात का प्रभाव होने से ये रूखा हो जाता है। स्वभाव में भी रूखापन आ जाता है। चीप्स को छूने पर वो खुरदरा मालूम पड़ता है । शरीर का कोई अंग खुरदरापन नज़र आये या रूखा नज़र आये तो वो वात है, वात का लक्षण है । 
उदाहरण :---
बादाम रूखा है तो इसमें वात है। इसको रात को पानी में भिगो दीजिये तो वात निकल जायेगा। रूखापन मतलब चिपचिपा का न होना। अगर कुछ चिपचिपा है तो वहां वात नही होगा। 


वात का चौथ चौथा लक्षण है आवाज । चीप्स को खाते समय आवाज आती है । कर कर की आवाज भी वात  की एक खूबी है। शरीर में वात के बढ़ जाने पर आवाज आती है। खासकर जहां शरीर के जोड़ हैं, वहां पर कट कट की आवाज आती है । आवाज वात का स्वभाव है। ऐसा निश्चित मानिए कि जो ज्यादा बोलता है उसको वात का प्रकोप होगा। बात बात पर चिल्लाने वाले लोगों को वात का रोग ज्यादा होगा। ऐसे लोगों में चिड़चिड़ापन आ जाता है मन अशांत हो जाता है ।

कोई आवाज पैदा कैसे होती है? 

दो बातें जरूरी है। पहली है गति दूसरी बात है कंपन।। तो आवाज आ रही है इसका मतलब गति भी है और कंपन भी। ये गति करने वाले सभी काम वात को  बढ़ाते हैं। पैर शरीर में सबसे ज्यादा गति करता है, इसलिए इसमें सबसे ज्यादा वात की बीमारी होती है। शरीर में जो हिस्सा ज्यादा कंपन करेगा, उसमें भी वात दोष जल्दी होगा। जैसे की हृदय और फेफड़े। गति का मतलब है एक जगह स्थिर न रहना। चंचलता वात का गुण है। 


अब पित्त पर विचार करते हैं। 

पित्त मतलब है  आग। आग तेज हो तो खाना जल्दी पक जाता है। शरीर में पित्त बढ़ा हुआ है तो खाना जल्दी पच जाता है। शरीर में गर्मी पित्त के कारण है। ज्यादा गर्मी होने पर व्यक्ति ठंडा पानी पीना चाहता है। बाल जल्दी पकना भी पित्त का लक्षण है। 

आग एक जगह छुपती नही है । वो अपना रूप सबको दिखाती है। पित्त प्रकृति के लोग भी show (दिखावा) ज्यादा करते है। खुद को एक्सपोज़ करते है। शरीर के दिखाने वाले अंग पर रोग हो जाते हैं । जैसे त्वचा संबंधी रोग,  आंख के रोग भी पित्त के रोग हैं।

आग बहुत तेज़ हो तो पत्थर भी लावा बनकर पिघल जाते है और बहने लगते हैं। पित्त प्रकृति के व्यक्ति का भोजन बहुत जल्दी पद जाता है और वह ज्यादा खा सकता है । शरीर से कोई लिक्विड ज्यादा निकलने लगे तो ये आग या पित्त होने का संकेत है। ज्यादा पसीना आना या ज्यादा पेशाब आना यह पित्त के ही लक्षण है । ज्यादा पीरियड होना या पाइल्स होना, डिसेंट्री होना सब गर्मी के बढ़ने से है। 

जब लोहा या कोई धातु को ज्यादा गर्म करियेगा तो उससे कई तरह के रंग लाल, नीला, नारंगी आदि दिखने लगते हैं। पित्त के कारण से शरीर में विभिन्न रंग दिखते हैं। गंध का आना भी पित्त का लक्षण है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति के शरीर से पसीने की बदबू बहुत आती है । विशेष कर मांस जलने की जैसी गंध पित्त बढ़े होने की निशानी है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति नमकीन, खट्टा या कड़वा खाना बहुत पसंद करते हैं । खट्टा या कड़वा खाना भी जलन उत्पन्न करता है । इसलिए ये भी पित्त को बढ़ाता है।


 जो गुण इन दोनों वात में या पित्त में न हो वो कफ में होगा।


(क) वात हल्का होता है तो कफ भारी होता है। भारी भोजन में कफ है।

(ख) वात सुखा या रुखा होता है तो कफ गीला होता है। 

(ग) वात चंचल (गतिशील) है। कफ स्थिर है। कफ जिनका बढ़ जाता है वो हिलना डुलना पसंद नही करेंगे। एक जगह फिक्स हो जाएंगे।

कफ चिपचिपा होता है। खांसी के समय जो बलगम निकलता है  वो कफ का उदाहरण है।


(क) पित गर्म होता है तो कफ ठंडा होता  है।

(ख) वात गैस है, पित लिक्विड है कफ ठोश है।
कफ गोरापन है । 

(ग) वात का शरीर हल्का है, पित का मध्यम और कफ का भारी।  

तो चीप्स, आग और तुलनात्मक दृष्टि के उदहारणों के द्वारा अपने त्रिदोष को समझ लिया होगा । कृपया टिप्पणी में अपने विचार अवश्य लिखें ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मर्कटासन परिचय विधि लाभ और हानियां

योग का स्वरूप