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त्रिदोष

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आयुर्वेद के तीन दोषों को जानिए ======================= वात , पीत और कफ को सरल उदाहरणों द्वारा समझिए । धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूप पुरुषार्थ चतुष्टय का आधार स्वस्थ शरीर ही हैं । कहा भी गया है :--- शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । स्वास्थ्य की सही परिभाषा यह है :--- समदोष: समाग्निश्च समधातु मलक्रियः । प्रसन्नात्मेन्द्रियमन: स्वस्थ इत्यभिधीयते ।।  ( सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान १५/१०) जिनके तीनों दोष :--- वात, पित्त और कफ समान हो, जठराग्नि न तीक्ष्ण न मन्द हो, शरीर को धारण करने वाले सात धातु :--- रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य समान अनुपात में हो, मल मूत्र की सम्यक् प्रवृत्ति हो, तथा दस इंद्रियां, मन एवं उनका स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ कहा जाता है । स्वास्थ्य की ऐसी हृदयग्राही और व्यवस्थित परिभाषा अन्यत्र मिलनी दुर्लभ है । आइए, अब इन तीनों दोषों को उदाहरण से समझते हैं । ( १.) वात दोष मेरे पास एक चिप्स का पैकेट है ।  lays कपनी का है।  ये वात का अच्छा उदाहरण है।  हवा वात का अभिप्राय हवा होता है । यह वात की मुख्य पहचान है । पैकेट म...