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मर्कटासन परिचय विधि लाभ और हानियां

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!!!---: मर्कटासन विधि लाभ और सावधानियां :---!!! ==================≠============= कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी और साइटिका के लिए विशेष उपयोगी आसन मर्कटासन । भूमिका अक्सर डेस्क जॉब करने वालों को पीठ और कंधें में दर्द होने की शिकायत रहती हैं। इसकी बड़ी वजह बदलती जीवनशैली भी है। ठीक से नींद न लेना, चौबीस घंटे में आधे से अधिक समय बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों में कम हिस्सा लेना भी पीठ दर्द और पेट की चर्बी बढ़ने का कारण हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर के पास भागने की बजाय योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, क्योंकि डॉक्टर आपको दर्द की दवा दे सकते हैं, लेकिन आपकी जीवनशैली नहीं सुधार सकते। तो पीठ दर्द और पेट की चर्बी कम करने के लिए जानें, आपको कौन सा योगासन अपनाने की जरूरत है। परिचय   "मर्कटासन" में दो शब्द है मर्कट+आसन । मर्कट वानर (बंदर) को कहा जाता है । बंदर की तरह है शरीर को करने से मर्कटासन बनता है । इसलिए इस आसन को वानरासन भी कहा जा सकता है । मर्कटासन को अंग्रेजी में "मंकी पोज़" (Monkey Pose) कहा जाता है।   यह आसन कमर दर्द और पेट की चर्बी घटाने के लिए काफी लाभकारी होता है। इसे करन...

एसीडिटी का समाधान

एसिडिटी की चिकित्सा ++++++++++++++++ बार-बार खट्टी डकार आना, जी मिचलाना, आफारा होना, पेट फूलना, पेट में गैस होना । यह सारी समस्याएं व्यक्ति को व्यथित करती हैं । पीड़ित करती हैं । दुखी करती हैं । इनसे बचने का उपाय यहां पर हम आपको दिखा रहे हैं । इन कारणों से होती है एसिडिटी की समस्या :-- * खान पान पर ध्यान न देने से * बाजारी, तीखे व चटपटे खाने के कारण * नशे व धूम्रपान के कारण * वक़्त पर खाना न खाने से * खाली पेट चाय पीने से * चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन करने से * शरीर में गर्मी का अधिक होना भी एसिडिटी का कारण बन सकता है। आयुर्वेदिक नुस्खे : पहला प्रयोगः प्रातः काल शौच क्रिया से निवृत्त होने के बाद एक लीटर कुनकुने पानी में 8-10 ग्राम सेंधा नमक डालकर पंजे के बल उकडुॅ बैठकर जल्दी-जल्दी पी जायें। फिर खड़े होकर कमर के बल झुक कर मुँह में उँगली डालकर वमन कर दें। इस क्रिया को गजकरणी कहते हैं। सप्ताह में एक बार करने से अम्लपित्त सदा के लिए मिट जाता है दूसरा प्रयोगः आँवले का मुरब्बा खाने अथवा आँवले का शर्बत पीने से अथवा द्राक्षा (किसमिस), हरड़े और मिश्री के सेवन से अम्लपित्त में लाभ होता है। तीसरा प्रयोग...

योगो भवति दुःखहा

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"युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ।।" (गीता) जिस व्यक्ति का आहार विहार ठीक है, जिस व्यक्ति की सांसारिक कार्यो के करने की निश्चित दिनचर्या है और जिस व्यक्ति के सोने-जागने का समय भी निश्चित है, ऐसा व्यक्ति ही योग कर सकता है तथा उसका योगानुष्ठान दुःखों का नाशक बनता है, अन्यों का नहीं ।