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भस्त्रिका प्राणायाम

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!!!--: भस्त्रिका प्राणायाम :---!!! ==================== लेखक :---- योगाचार्य डॉ. प्रवीण कुमार शास्त्री Yog परिचय ×××××× किसी ध्यान उपयोगी आसन में सुविधा अनुसार बैठकर दोनों नासिका से श्वास को पूरा अंदर डायाफ्राम तक भरना तथा बाहर सहजता के साथ छोड़ना "भस्त्रिका प्राणायाम" कहलाता है । लेखक :---- योगाचार्य डॉ. प्रवीण कुमार शास्त्री  भस्त्रिका प्राणायाम के समय शिव संकल्प ××××××××××××××××××××××××××× भस्त्रिका प्राणायाम में श्वास को अंदर भरते हुए मन में विचार (संकल्प) करना चाहिए कि ब्रह्माण्ड में विद्यमान दिव्य शक्ति, ऊर्जा, पवित्रता, शान्ति और आनन्द आदि जो भी शुभ है, वह प्राण के साथ मेरे देह में प्रविष्ट हो रहा है । मैं दिव्य शक्तियों से ओत-प्रोत हो रहा हूं । इस प्रकार दिव्य सङ्कल्प के साथ किया हुआ प्राणायाम विशेष लाभप्रद होता है । लेखक :---योगाचार्य डॉ. प्रवीण कुमार शास्त्री  भस्त्रिका प्राणायाम का समय ××××××××××××××××××× ढाई सेकेंड में श्वास अंदर लेना एवं ढाई सेकेंड में श्वास को एक लय के साथ बाहर छोड़ना । इस प्रकार बिना रुके एक मिनट में 12 बार भस्त्रिका प्राणायाम होगा...

योग का स्वरूप

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!!!--: योग का स्वरूप : ---!!! =================== संकलनकर्त्ता :---- योगाचार्य डॉ. प्रवीण कुमार शास्त्री योग शब्द वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों आदि में अति पुरातन काल से व्यवहृत होता आया है । भारतीय दर्शन में योग एक अति महत्वपूर्ण शब्द है । आत्म दर्शन एवं समाधि से लेकर कर्मक्षेत्र तक के लिए योग का व्यापक व्यवहार हमारे शास्त्रों में हुआ है । योगदर्शन के उपदेष्टा महर्षि पतंजलि योग शब्द का अर्थ चित्तवृत्ति का निरोध करते हैं :--- " योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" ( योगदर्शन १/२) संकलनकर्त्ता :---- योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा, स्मृति ये पञ्चविध वृत्तियां (" प्रमाणविपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः पञ्च वृत्तयः" योगदर्शन १/६) जब अभ्यास एवं वैराग्य आदि (" अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः" योगदर्शन १/१२ साधनों के द्वारा निरुद्ध हो जाती है और आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित हो जाता है तब योग होता है :---" तथा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्" ( योगदर्शन १/३) संकलनकर्त्ता :---- योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री महर्ष...