मर्कटासन परिचय विधि लाभ और हानियां
!!!---: मर्कटासन विधि लाभ और सावधानियां :---!!!
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कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी और साइटिका के लिए विशेष उपयोगी आसन मर्कटासन ।
अक्सर डेस्क जॉब करने वालों को पीठ और कंधें में दर्द होने की शिकायत रहती हैं। इसकी बड़ी वजह बदलती जीवनशैली भी है। ठीक से नींद न लेना, चौबीस घंटे में आधे से अधिक समय बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों में कम हिस्सा लेना भी पीठ दर्द और पेट की चर्बी बढ़ने का कारण हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर के पास भागने की बजाय योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, क्योंकि डॉक्टर आपको दर्द की दवा दे सकते हैं, लेकिन आपकी जीवनशैली नहीं सुधार सकते। तो पीठ दर्द और पेट की चर्बी कम करने के लिए जानें, आपको कौन सा योगासन अपनाने की जरूरत है।
"मर्कटासन" में दो शब्द है मर्कट+आसन । मर्कट वानर (बंदर) को कहा जाता है । बंदर की तरह है शरीर को करने से मर्कटासन बनता है । इसलिए इस आसन को वानरासन भी कहा जा सकता है । मर्कटासन को अंग्रेजी में "मंकी पोज़" (Monkey Pose) कहा जाता है।
यह आसन कमर दर्द और पेट की चर्बी घटाने के लिए काफी लाभकारी होता है। इसे करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, हाथ-पैरों और कमर का दर्द और मोटापा काम होता है।
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जमीन पर सीधे शवासन की स्थिति में लेट जाइए। ध्यान रहे, दोनों पैर मिले रहें, हाथ बगल में और हथेलियां जमीन पर रहें।
दोनों हाथ कंधों की सीध में फैला लीजिए, हथेलियां जमीन पर अंगुलियां आपस में मिली हुईं और सीधी रखें ।
पैरों को बायी तरफ ले जाइए और तब तक झुकाते रहिए जब तक दाहिने पैर का अंगूठा बायीं तरफ जमीन स्पर्श करने लगे।
अपनी गर्दन और सिर दायीं ओर घुमाइए। अब यह आसन की पूर्ण अवस्था में है।
इस स्थिति में आप 30 सेकंड से एक मिनट तक रह सकते हैं।
यही प्रक्रिया दूसरी ओर से करें। इसमें बायीं एड़ी ऊपर रहेगी और गर्दन सिर बायीं ओर घूमेगा, पैर दायीं ओर जाएंगे। इस क्रिया को तीन से पाॅच बार करें।
पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नितम्बों के पास रखें, पैरों में लगभग डेढ़ फुट का अन्तर रखें (दोनों हाथ कन्धों की सीध में फैली हुई हथेलियां ऊपर आकाश की ओर हों)। अब दायें घुटने को दायीं ओर झुकाकर जमीन पर टिका दें, बायें घुटने को दाहिने पैर की एड़ी पर रखें । गर्दन को बायीं ओर अर्थात् विपरीत दिशा में मोड़कर रखें। इसी प्रकार से दूसरे पैर से भी करें। इसे 'मर्कटासन -2' कहते हैं।
पहली विधि से दूसरी विधि में केवल इतना अंतर है कि पैरों के बीच की दूरी डेढ़ फुट होती है । पहली विधि में दोनों पैर मिला कर रखते हैं और कोई दूरी नहीं रखते हैं जबकि दूसरी विधि में डेढ़ फुट की दूरी रखते हैं । दूसरा अंतर यह है कि एक पैर का घुटना दूसरे पैर की एड़ी से स्पर्श करता है । बस केवल इतना अंतर है ।
विधि :---३
सीधे लेटकर दोनों हाथों को कन्धे के समानान्तर दोनों तरफ फैलाए, हथेलियाँ आकाश की ओर खुली हों । दायें पैर को ९० डिग्री ऊपर उठाकर धीरे-धीरे बायें हाथ के पास नीचे ले जायें, गर्दन को दायीं ओर मोड़कर रखें । कुछ समय इसी स्थिति में रहने के बाद पैर को ९० डिग्री पर सीधा उठाकर धीरे-धीरे भूमि पर टिका दें। इसी तरह बायें पैर से भी इस क्रिया को करें।
इस तरह से मर्कटासन की तीन विधियां हैं और इन तीनों विधियों को करने से मर्कटासन पूरा हो जाता है ।
मर्कटासन से लाभ
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इसे करने से रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ जाता है।
मर्कटासन, पसलियों और फेफड़ों के लिए अच्छा व्यायाम होता है।
यह कब्ज और पेट से संबंधित समस्याओं में सबसे ज्यादा लाभकारी होता है।
इस आसन को नियमित रूप से करने पर कब्ज और गैस ठीक हो जाती है।
मर्कटासन के द्वारा आत्म-ज्ञान बढ़ता है और रचनात्मकता में भी वृद्धि होती है । साथ ही इससे एकाग्रता भी बढ़ती है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी और कमर के लिए अत्यंत लाभकारी है। इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है और उससे जुड़ी हुई नाडि़यों का व्यायाम भी हो जाता है। इससे साइटिका के दर्द में भी लाभ मिलता है।
मर्कटासन, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाने के लिए एक उत्कृष्ट आसन है और यह पाचन तंत्र के अंगों को भी लाभ प्रदान करता है।
मर्कटासन लेट कर किये जाने वाले आसनो में से एक होता है। मर्कटासन शरीर के साथ साथ दिमाग को आराम पहुंचाने के लिए बहुत प्रभावी होता है।
यह विशेष रूप से पीठ दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, कटिस्नायुशूल में उपयोगी होता है। यदि इसे नियमित रूप से किया जाए तो यह पीठ दर्द और पेचिश में भी फ़ायदेमंद होता है। कूल्हों और जोड़ों में दर्द के लिए भी मर्कटासन उत्तम आसन होता है।
मधुमेह रोगियों के लिए भी मर्कटासन बहुत लाभकारी होता है ।
मर्कटासन की सावधानियां
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यदि किसी व्यक्ति के पैरो और घुटनों में दर्द है तो इस आसन को न करे।
जो लोग गंभीर पीठ दर्द से ग्रस्त हैं वे इस आसन को ना करे ।
अगर कोई हर्निया का पेशेंट है तो या तो इस आसन को ना करें या फिर उसको कुशल और शिक्षित योग प्रशिक्षक के सान्निध्य में यह आसन करना चाहिए और जिनके गंभीर पीठ दर्द है । वह यह आसन बहुत ही सरलता पूर्वक एवं प्रशिक्षक के अंतर्गत रहकर करें ।
मुझसे संपर्क करने के लिए लिखें :----
praveen.shastri@ymail.com
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